June 25, 2016 छिंदवाड़ा के किसान रविंद्र चौधरी

मध्य प्रदेश के एक किसान ने कर दिखाया कमाल

अक्सर किस्से कहानियों में सुनते हैं कि खेती की जमीन सोना उगल सकती है। एक फिल्म गाने के बोल भी है – मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे-मोती, मेरे देश की धरती। ये बात मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के एक किसान रविंद्र चौधरी ने सच साबित कर दी है।

पत्थरों के बीच उगाया ‘सोना’

अगर आपको लगता है कि बंजर जमीन किसी काम की नहीं, इसकी कोई कीमत नहीं या फिर इस पर आप खेती के जरीए कमाई नहीं कर सकते हैं, तो आप अपनी सोच को अब बदल लीजिए। आज हम आपको एक ऐसे किसान का सफलता की कहानी बता रहे हैं जिसने पथरीली जमीन पर ऐसी मेहनत की कि अब उसे सालाना 80 लाख रूपए कमाने को मिलेंगे।

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में एक गांव हैं पांढुर्ना। इस गांव में रविन्द्र चौधरी नाम का एक किसान रहता है। जिसके दो साथी और हैं – मनीष डोंगरे और लखन डोंगरे। इनके पास 4 साल पहले तक पथरीला खेत हुआ करता था। लेकिन अब यही पथरीला खेत हरियाली से भर गया है। रविंद्र, मनीष और लखन की त्रिमूर्ति ने मिलकर एक साल तक इस पथरीली जमीन पर काम किया। फिर बंजर जमीन को खेती लायक बनाया और 2 साल पहले 12 एकड़ खेत में 4017 अनार के पौधे लगा दिए।

साथ में उन्होंने इस खेत पर ड्रिप इर्रिगेशन तकनीक का इस्तेमाल किया। अब 8 हफ्ते बाद ही उनको अनार की पहली पैदावार मिल जाएगी, जो कि करीब 80 लाख के आसपास होगी। इतनी रकम की फसल अब उनको हर साल अगले 12 साल तक मिलती रहेगी।

शिर्डी से कैसे मिली प्रेरणा

दरअसल, रविंद्र करीब 3 साल पहले शिर्डी गए थे। लौटते समय रविंद्र ने रास्ते में अनार का एक बाग देखा। बाग के मालिक से मिलने पर पता चला कि इसका मालिक तो साधारण किसान है और वो करीब 1.25 करोड़ के कीमत की फसल हर साल पैदा कर लेता है। इस बात से रविंद्र को समझ आ गया कि उनके गांव बेकार पड़ी पथरीली जमीन से सोना कैसे पैदा किया जा सकता है।

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