July 12, 2016

राजस्थान के एक सफल युवा किसान की कहानी

लोग तो सरकारी नौकरी के लिए क्या क्या नहीं करते, लेकिन राजस्थान के हरीश धनदेव को सरकारी नौकरी मिली, तो उन्होंने कुछ समय बाद ही इसे छोड़ दिया। है ना हैरत में डालने वाली खबर। दरअसल, हरीश धनदेव को सरकारी नौकरी से ज्यादा अच्छा भविष्य खेती में दिख रहा था।

दरअसल, एक बार हरीश एक एग्रिकल्चर एक्स्पो देखने दिल्ली गए थे। एक्सपो में जो कुछ उन्होंने देखा, उसने हरीश की जिंदगी ने एक सुखद मोड़ ले लिया। नौकरी छोड़कर हरीश ने अपनी 120 एकड़ खेत पर ऐलोवेरा और बाकी फसलों की खेती करने लगे।




सरकारी नौकरी छोड़ खेती करने वाला सफल किसान
सरकारी नौकरी छोड़ खेती करने वाला सफल किसान

इस रेगिस्तानी इलाके में उपजी ऐलोवेरा की Quality इतनी बढ़िया है कि देश-विदेश के मार्केट में इसकी भारी डिमांड है। पतंजलि के विशेषज्ञों को हरीश के ऐलोवरा की क्वालिटी इतनी पसंद आई कि उन्होंने तुरंत इसके लिए ऑर्डर दे दिया।

जैसलमेर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में जूनियर इंजिनियर की नौकरी हरीश को मिल गई थी, लेकिन उनका मन हमेशा कुछ और चाहता था।

हरीश के पास खेत था और खेत में पानी भी, लेकिन क्या करें, ये आइडिया नहीं था।

लेकिन दिल्ली में एग्रिकल्चर एक्स्पो से उनके दिमाग में ऐलोवेरा की खेती का खयाल आया। रेगिस्तान में आम तौर पर सरसों, मूंग, बाजरा और गेहूं फसलें उगाई जाती हैं लेकिन हरीश ने ऐलोवेरा की खेती करने का रिस्की फैसला लिया और उन्हें कामयाबी मिली।

aloe-vera-gel-on-wooden-spoon-1हरीश ने शुरू में ऐलोवेरा के तकरीबन 80,000 पौधे लगाए थे, जो अब बढ़कर 7 लाख तक पहुंच गए हैं।

हरीश के मुताबिक पिछले 4 महीनों में उन्होंने 125-150 टन प्रोसेस्ड ऐलोवरा पल्प हरिद्वार में पतंजलि फैक्ट्री में भेजे हैं। पतंजलि के पास ऐलोवेरा को प्रोसेस करने के लिए मॉडर्न टेक्नॉलजी की सुविधा है।

नोट – एलोवीरा की खेती कैसे की जाएं, इसकी कितनी लागत आती है और कहां बेचा जा सकता है, इसकी पूरी जानकारी वाली एक खास रिपोर्ट हम जल्द ही पोस्ट करेंगे। पढ़ते रहिए किसानख़बर.कॉम

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