August 10, 2016 Oyster Farming in Goa

गोवा का नाम लेते ही आपके जेहन में खूबसूरत समुद्री किनारों (समुद्री बीच) और उन पर मौज मस्ती करते देसी-विदेशी पर्यटकों की तस्वीर दिमाग में आती होगी। लेकिन क्या कभी सोचा है कि गोवा के समुद्र के खारे पाने में बेहद कम लागत में 100 प्रतिशत से ज्यादा लाभ कमाने का तरीका भी छुपा हुआ है। नहीं ना। चलिए आज इस खास रिपोर्ट के जरिए इस राज को भी आप जान लीजिए।




गोवा में खारा पाने की कोई कमी नहीं है। यहां का 330 हैक्‍टर क्षेत्र का तटवर्ती इलाका, समुद्री जीव के पालन के बिजनस को बढ़ावा देने के लिए बिल्कुल सही है। खास तौर पर सीप (Oyster Farming) के लिए। लेकिन लोगों के बीच इस बारे में कुछ भी नहीं पता होने की वजह से इस दिशा में कभी सक्रियता से काम नहीं हो सका। इसी तरह की हमने पहले भी एक खबर पोस्ट की थी, जिसमें महाराष्ट्र में एक महिला सीप (Oyster Farming) के जरिए की 6 हजार की लागत पर 50 हजार की कमाई करती है। इस खबर को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

पर्यटकों की फेवरेट टूरिस्ट जगह होने की वजह से और गोवा की बड़ी जनसंख्‍या के मछली भोगी होने की वजह से गोवा में फिन फिश तथा शैलफिश की बहुत मांग है।




कब किया जाता है और कैसे किया जाता है

इस दिशा में ICAR के Goa स्थित सेंटर ने पिछले छह साल में नवम्‍बर के दौरान एंटोनियो बास्‍को मैनेंजिस, गोवावेल्‍हा की शूकर पालन इकाई के साथ मिलकर काम कर रहा हैं।

हरा सीप, पेरना विरिडिस जिसे स्‍थानीय लोग ‘जि़नेनेयो’ के नाम से बुलाते हैं, गोवा के लोगो के बीच पसंद की जाने वाली प्रमुख शैलफीश प्रजाति है। 40-60 मि.मी. साइज के एक सीप का औसत वजन 30-33 ग्राम होता है और गोवा के फुटकर बाजार में इसकी कीमत लगभग 5 से 8 रुपये है।

आमतौर पर इनकी कल्‍चर अवधि समुद्र के तटीय क्षेत्रों में पर्याप्‍त सीप जीरा स्‍थापित होने के बाद नवम्‍बर या दिसम्‍बर में शुरु होती है। यह अवधि मई यानी लगभग 6-7 महीनों तक रहती है। इनकी Capturing जून से पहले कर लेनी चाहिए क्‍योंकि बरसात से पानी की लवणता (Salinity) घट जाती है और इससे सीप की ग्रोथ रूकने का खतरा रहता है।




कितनी लागत और कितनी लाभ

रैक संरचना में स्‍टॉकिंग के लिए 1 कि.ग्रा. सीप स्‍पैट (28 मि.मी. लंबाई के औसत आकार व 2 ग्रा. भार के) का उपयोग किया गया। मछली पालक किसानों ने 60 कि.ग्रा. सीप स्‍पैट से कुल 186.125 कि.ग्रा. वजन के 5760 सीपों का उत्‍पादन किया। प्रत्‍येक सीप को जिसका औसत भार 33 ग्रा. था, 5/- रु. प्रति नग के हिसाब से बेचा गया। कुल उत्‍पादन लागत लगभग 14,370/- रु. थी। यानी 5760 सीप कुल 28,800 रूपए के बिके और लागत घटाने के बाद लाभ 16,510 रूपए रहा, जो कि लागत रूपए 14,370 के 100 प्रतिशत से भी ज्यादा है।

इस शुरुआत के बाद अब वहां पर बाकी किसान भी बेहद कम लागत और कम मेंटेनेंस वाले इस काम में रूचि दिखा रहे हैं।

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