November 28, 2016 how-to-do-farming-of-papaya

पपीता – ये नाम सुनते ही आपको एक ऐसा फल याद आ जाता है जो हर किसी की जेब पर भारी नहीं पड़ता। आप चाहे बीमार हो या ना हो, लेकिन इसे कभी भी खालिए और स्वस्थ रहिए। 12 महीने आसानी से मिलने वाला पपीता खाने पर कभी भी नुकसान नहीं देता। इसी तरह पपीता की खेती भी किसानों की जेब ही भर्ती है।

आज जानते हैं कि पपीते की खेती कैसे होती है और इसके लिए क्या क्या जरूरी होता है।

पपीता बेहद उपयोगी, कम समय और कम मेहनत में अच्छा उत्पादन देने वाला फल है। इसकी खेती के लिए 25 से 35 डिग्री सेल्सियस का तापमान अनुकुल है। अगर मिट्टी की बात करें, तो पपीते के लिए 6.5 से 7.5 पीएच मान वाली दोमट मिट्टी अच्छी रहती  है।




बीजोपचार – एक हेक्टेयर क्षेत्रफल के लिए 500-600 ग्राम बीज की जरुरत होती है। बोने से पहले 3 ग्राम केप्टॉन प्रति किलो ग्राम की दर से बीजोपचार कर लेना चाहिए।

प्रवर्धन – पपीते का प्रवर्धन बीज द्वार होता है। इसकी पौधशाला के लिए उठी हुई क्यारियां होनी चाहिए। क्यारियों में 2 ग्राम प्रति वर्गमीटर की दर से ट्राईकोडर्मा पॉवडर मिलाना चाहिए। वहीं बीजों की गहराई 1-1.5 सेमी, इनके बीच दूरी 2 सेमी और कतारों में 10 सेमी की दूरी रखनी चाहिए। जब पौधे 15-20 सेमी के हो जाए तो खेत में उसका रोपण कर देना चाहिए।

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पौधरोपण – 45 गुणा 45 गुणा 45 गुणा सेमी के गड्ढे 2 गुणा 2 मीटर की दूरी पर तैयार करें। हर गड्ढे में 10 किलो सड़ी गोबर खाद, 500 ग्राम जिप्सम, 50 ग्राम क्यूनालफास 1.5 प्रतिशत चूर्ण भर देना चाहिए।




सिंचाई – पौधा लगाने के तुरंत बाद सिंचाई करें, लेकिन ध्यान रहें कि पौधे के तने के पास पानी नही भरा रहें। गर्मियों में 5 से 7 दिन और सर्दियों में 10 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें।




उपज – पौधा लगाने के 9-10 महिने बाद फल तोडने लायक हो जाता है। फल का रंग हरा से बदलकर हल्का सा पीला हो जाएं और नाखून लगने पर फल से दूध के स्थान पर पानी या तरल निकले तो समझें कि फल पक गया है। नियंत्रित अवस्था में एक पौधे से औसतन 200 ग्राम पपेन और 40-70 किलो उपज प्राप्त होती है।

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Archana Singh
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