October 12, 2016 Green House A to Z Information

पिछले कई दिनों से कई किसानों ने ग्रीन हाउस को बनाने से लेकर लागत के सवाल पूछे थे। इन सभी सवालों के जवाब आपको रिपोर्टर मोनिका सिंह की इस स्पेशनल रिपोर्ट में मिलेंगे। ये रिपोर्ट, कृषि एक्सपर्ट, ग्रीन हाउस के एक्सपर्ट्स और बाजार के एजेंट्स के आधार पर बनाई गई है।

ग्रीन हाउस क्या होता है – यूं समझ लीजिए कि आपने खेत को चारो तरफ से एक विशेष प्रकार की पारदर्शी मोटी पॉलीथीन से ढक दिया हो, ताकि सब्जियों और फूलों की खेती के लिए वैसा ही वाताणरण मिल सके, जैसा कि सब्जियों और फूलों की खेती के लिए जरूरी होता है।

लोन – केंद्र सरकार, राज्य सरकारें और अन्य प्राइवेट कंपनियां भी ग्रीन हाउस की खेती में रूचि रखने वाले किसानों को ना केवल तकनीकी बल्कि आर्थिक मदद भी कर रहे हैं। कई सरकारी एंजेंसियां और विभाग ग्रीन हाउस बनाने के लिए कम ब्याज दरों पर लोन देते हैं।

इसमें कुल लागत का 25 प्रतिशत, किसान को लगाना होता है जबकि बाकी 75 प्रतिशत का लोन 7 साल के लिए मिल जाता है। पहले साल ब्याज और दो साल तक मूलधन नहीं चुकाना होता।

ग्रीन हाउस बनाने के लिए क्या क्या चाहिए होता है

  1. खेती की जमीन (अगर स्थानीय बाजार के नजदीक हो, तो लागत पर काफी कम हो जाती है।)
  2. ग्रीन हाउस का ढांचा बनाना।
  3. ग्रीन हाउस को बनाने में इस्तेमाल होने वाले छोटी-बड़ी मशीनें
  4. सिंचाई में काम आने वाला सामान
  5. फर्टिलाइजर से जुड़ा सामान
  6. ग्रेडिंग और पैकिंग के लिए जगह
  7. रेफ्रिजरेटर वैन की जरूरत
  8. ऑफिस में लगने वाले इलैक्ट्रॉनिक सामान
  9. ग्रीन हाउस में इस्तेमाल होने वाली न्यू टेक्नोलॉजी वाली मशीनें
  10. मजदूर
  11. कीटनाशरों, उर्वरकों और प्रेजरवेटिव्स पर होने वाली लागत

लागत –

ग्रीन हाउस अगर आप बनाने का विचार कर रहे हैं, तो इससे जुड़ी लागत पर खासा ध्यान देने की जरूरत है। इसमें दो तरह की लागत आती है। पहली – शुरु में लगने वाली स्थाई लागत और दूसरी हर साल होने वाली लागत।

स्थाई लागत –

स्थाई लागत का मतलब है ऐसी लागत जो एक बार होने है। जैसे कि खेती की जमीन खरीदना या फिर ग्रीन हाउस का ढांचा तैयार करना।

हर साल बार बार होने वाली लागत –

इसका मतलब है ऐसी लागत जो हर साल हर सीजन में बार बार होती है। जैसे कि बुआई की लागत या भी मजदूरों पर होने वाला खर्च इत्यादि।

नीचे हमने दोनों तरह की लागत का पूरा ब्यौरा दिया है। यहां लागत का ये ब्यौरा गुलाब के फूलों की खेती को ध्यान में रखते हुए दिया गया है। बाकी फूलों और सब्जियों के लिए भी ग्रीन हाउस बनाने की लागत अमूमन इसी के आसपास रहती है। नीचे दी गई लागत प्रति हेक्टेयर है (1 हेक्टेयर में 2.5 करीब एकड़ होता है।)

स्थाई लागत –

विवरण कीमत लाख में (रूपए)
जमीन और उसको तैयार करने का खर्च 4
ग्रीन हाउस को बनाने की लागत 13
कोल्ड स्टोरेज की लागत 10
ऑफिस बनाने की लागत 2.5
पैकिंग और ग्रेडिंग की लागत 5
रेफ्रिजरेटिड वैन की लागत 1
जेनरेटर सेट 2
टेलीफोन, कम्प्यूटर और फैक्स इत्यादि 1
फर्नीचर 50 हजार रूपए
बिजली का पूरा इंतजाम 2
जल आपूर्ति, फॉगिंग मशीन और ड्रीप सिंचाई की मशीनों पर हने वाल खर्च 30
कुल लागत 77 लाख रूपए

हर साल होने वाली लागत

विवरण कीमत लाख में (रूपए)
बिजली का सालाना खर्चा 6
खाद और फर्टिलाइजर पर होने वाला खर्च 1
पौधों की सुरक्षा पर होने वाला खर्च 1
प्रीजरवेटिव्स की लागत 3
पैकिंग का सामान 2
हवाई जहाज से माल ढुलाई का खर्चा 1 करोड़ 25 लाख रूपए
मजदूरी 3
कमीशन या इंश्योरेंस इत्यादि 15
कर्मचारियों का वेतन 5
अन्य छोटे मोटे खर्चे 50 हजार रूपए
अन्य इंमरजैंसी खर्चे, पेट्रॉल इत्यादि 4
कुल सालाना लागत 1 करोड़ 66 लाख 50 हजार रूपए

यानी पहले साल स्थाई लागत और अस्थाई लागत को मिलाकर कुल 2 करोड़ 43 लाख 50 हजार रूपए का खर्च आएगा।

मुनाफा – अब बात आती है असली मुद्दे की यानी मुनाफा कितना होगा। आप सोच रहे होंगे कि करीब 2.5 करोड़ की लागत लगाने वाला किसान गिने चुने ही होंगे और इस कमाने में सालों बीत जायेंगे लेकिन आप गलत सोच रहे हैं। एक हेक्येटर की लागत करीब 2.5 करोड़ आती है और इसे पहले ही साल में ना केवल वसूल किया जा सकता है बल्कि मोटा मुनाफा भी कमाया जा सकता है। कैसे, जरा आगे देखिए मुनाफे का पूरा हिसाब किताब।

उत्पादन कितना होगा और कितने का बिकेगा माल

विवरण उत्पादन या कमाई
एक हेक्टेयर में गुलाब के कितने पौधे लगेंगे 60 हजार
हर एक पौधे से कितने गुलाब के फूल मिलेंगे 100 से 150
कितने फूल एक्सपोर्ट क्वालिटी के होंगे 60 से 100
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में प्रति गुलाब की कीमत 6 से लेकर 11 रूपए तक
प्रति एकड़ कितने गुलाब एक्सपोर्ट किए जा सकेंगे 60 लाख

 

कमाई

अगर एक एकड़ में 60 लाख गुलाब एक्सपोर्ट क्वालिटी के निकलते हैं तो एक हेक्येटर में 1.5 करोड़ गुलाबों का उत्पादन होगा, जिनकी कम से कम 6 रूपए प्रति नग के हिसाब से अगर बिक्री होती है, तो 9 करोड़ रूपए की बिक्री होगी।

अगर आप खुद देख लीजिए कि कितनी लागत और कितनी कमाई हो सकती है। अगर इसमें अगर बहुत खराब उत्पादन, लोन की ब्याज, मूल इत्यादि चुकाने के बाद की कमाई की बात करें, तो 1 हेक्टेयर में 3 करोड़ की लाभ तो मिल ही सकता है।

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मोनिका सिंह को पत्रकारिता का 10 साल का अनुभव है