November 6, 2016 birdflu se kaise bache

दिवाली निकल चुकी है और अब मौसम तेज से करवट बदल रहा है। मौसम अब धूप से गुनगुनाती ठंड की और बढ़ रहा है। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक ऐसे मौसम में मुर्गियों में बर्ड फ्लू फैलने का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ जाता है।

इस बदलते मौसम के बीच ही H1N1 जीवाणु के फैसलने की संभावना तेजी से बढ़ती है और फिर बर्ड फ्लू सभी को अपनी चपेट में लेने लगता है। इससे ना केवल माल की बल्कि जान का भी भारी नुकसान होता है।

अगर इस मौसम में मुर्गीपालन की बिजनस करने वालों ने फॉर्म हाउस को मेनटेन करने पर ध्यान नहीं दिया, तो इसकी चपेट में आने का खतरा बढ़ जाता है।

वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. वी के सिंह के मुताबिक 2006 में इस बार ने पहली बार भारत में बड़े स्तर पर पैर फैलाए थे। यह एवियन फ्लू पक्षियों की बिमारी मानी जाती है। मुर्गी से इंसान में इस बिमारी के फैलने की संभावना सबसे ज्यादा होती है।

बर्ड फ्लू के फॉर्म हाउस में फैसले से बचने के लिए क्या करें

  1. इसके फैलने से पहले ही रोकथाम के लिए सबसे पहले फॉर्म हाउस की सभी मुर्गियों में टीकाकरण कराया जाना सबसे ज्यादा जरूरी होता है।
  2. मुर्गियों की रखने की जगह पर सफाई बहुत ज्यादा रखें। क्योंकि मुर्गियों को टीका लगा देने से ही पूरी सुरक्षा नहीं हो जाती। मुर्गियों से निकलने वाले मल से दूसरों में ये बिमारी फैलने का खतरा रहता है। जिसे सिर्फ सफाई के जरीए ही रोका जा सकता है।
  3. फॉर्म हाउस की सफाई में लगने वाले कर्मचारियों को इस मौसम में हर समय मुंह पर मास्क और हाथ में दस्ताने पहनकर ही काम करना चाहिए।
  4. जगह की रोजाना 3 से 5 बार सफाई जरूर करें।
  5. सफाई के बाद कर्मचारी अपने हाथों और मुंह इत्यादि शरीर के अंगों को साबुन के पानी या डिटरजेंट जैसी चीजों से अच्छे से साफ करें क्योंकि इससे बर्ड फ्लू के वायरस का असर कम हो जाता है।
  6. हालांकि इसका असर 60 से 70 डिग्री सेल्सियम तापमान में भी खत्म हो जाता है लेकिन इतना तापमान नवंबर से फरवरी के बीच होना संभव नहीं होता। इसलिए अगर आप इस मौसम में चिकन इत्यादि नोन वेज खा रहे हैं तो उसे बहुत अच्छे ढंग साफ करने के बाद अच्छे से पका जरूर लें।

 

 

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वंदना सिंह को पत्रकारिता का 10 साल का अनुभव है