June 14, 2016 Benefits of cow dung

बिना खर्चा किए खेत की मिट्टी की ताकत बढ़ाने का आसान तरीके

वैज्ञानिकों के मुताबिक खेत में लगे पौधे मिट्टी से ही 1.5 से 2 प्रतिशत तक जरूरी पोषक तत्व ले लेते हैं, जबकि बाकी 98 % की कमी पानी और हवा से हो जाती है। लेकिन ज्ञान की कमी के कारण किसान, 2 प्रतिशत के लिए तरह तरह के रसायनों और पेस्टीसाइट्स का धड़ल्ले से इस्तेमाल करते हैं। इसका नुकसान पेस्टीसाइट्स वाली सब्जियां और फसलों को खाने वाले लोगों के शरीर हो उठाना पड़ता है।

एक दौर था जब रासायनों और पेस्टीसाइट्स ने फसल का उत्पादन कई गुना बढ़ा दिया लेकिन अब दुनिया इसके नुकसान देख रही है। अब फसल का उत्पादन गिरने लगा है और कोड़ में खाज ये कि मिट्टी की ताकत अब कमजोर हो रही है।

ऐसे में हम अब एक ऐसा तरीका बता रहे हैं जिसका इस्तेमाल करने से आपके खेत की मिट्टी की ना केवल उपजाऊ क्षमता बढ़ जाएगी बल्कि उत्पादन भी बढ़ेगा।

  1. अक्सर देखा जाता है कि जब गाय दूध देना कम या बंद कर देती है, तो लोग उन्हें सड़क पर यूं ही खुला छोड़ देते हैं या फिर कट्टीखाने में बेच देते हैं। ये एक भारी भूल है। दूध ना देने वाली गाय अभी भी आपके खेत की फसल के लिए बहुत काम की है। ऐसी गाय का गोबर खेत के लिए बहुत ज्यादा लाभकारी होता है। खेत में इनका गोबर डालने से मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ती है।
  2. ध्यान रहे कि जर्सी और होल्स्टेन गाय के गोबर के मुकाबले, देसी गाय के गोबर की खाद खेत के लिए ज्यादा अच्छी होती है।
  3. यदि गाय का गोबर नहीं मिल रहा है तो बैल या भैंस का गोबर का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
  4. यदि काले रंग वाली ‘कपिला गाय’ का गोबर और गोमूत्र मिल जाए, तो इससे और भी ज्यादा अच्छी खाद बनाई जा सकती है।
  5. खाद के लिए गोबर जितना ज्यादा ताजा होगा, ऊतना ज्यादा अच्छा होगा। जबकि गोमूत्र जितना ज्यादा पुराना हो, ऊतना ज्यादा अच्छा है।
  6. 1 महीने में 1 एकड़ में 10 किलो गोबर डाला जाता है। जबकि 1 गाय रोजाना औसतन 11 किलो गोबर देती है। इसका मतलब है कि 30 एकड़ के खेत के लिए सिर्फ 1 गाय का ही गोबर काफी है।
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वंदना सिंह को पत्रकारिता का 10 साल का अनुभव है