December 14, 2016

(छत्तीसगढ़ के गाम अर्जूनी टिकरी, जिला बालोद के किसान भाई आशीश देवगन के अनुरोध पर बटेर पालन की जानकारी)

मूर्गी पालन के व्यवसाय से हमारे किसान भाई बखुबी परिचित होंगे। लेकिन आज हम आपकों बटेर पालन के बारे में जानकारी देने जा रहे है। जिस किसान के पास ज्यादा जमीन नही है वो कम लागत से होनेवाले इस व्यवसाय को कर सकते है। आपके आस पास खेत खलिहान में पाये जानेवाला बटेर मूर्गी पालन से बेहतर विकल्प बन सकता है।

प्राचिन काल से ही मांस खाने के शौकिन लोगों की बटेर पहली पसंद रहा है। बटेरों की घटती संख्या को देखते हुए सरकार ने इस पर कुछ साल तक प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन अब ये प्रतिंबध हटा दिया गया है। आज बटेर पालन गैर कानूनी नही है। सरकार इसे मूर्गी पालन के विकल्प के तौर पर देख रही है। कई मायनो में बटेर पालन मूर्गी पालन से लाभदायी है।

बटेर पालन की विशेषता

बटेर पालन का व्यवसाय मूर्गी पालन से मिलता झूलता है। लेकिन मूर्गी पालन से कम खर्च वाला और ज्यादा मुनाफा देनेवाला है। बटेर भोजन के रुप में प्राचिन काल से प्रचलित है। अपने स्वादिष्ट मांस और पौष्टिकता के मामले में बटेर मांसाहारी लोगों की पहली पसंद है। बटेर 5 हफ्ते में परिपक्व हो जाते है और बाजार में आसानी से बेचे जा सकता है। बटेर में रोग या बीमारी न के बराबर होती है। जिसकी वजह से बटेर पालनेवालों को इसका फायदा मिलता है। बटेर को कोई टीका या दवा देने की जरुरत नही है जिससे पालनेवालों के पैसे बचते है।

 कैसे करें रखरखाव

  • बटेर को रखने के लिए अलग घर की जरुरत नही।
  • इसे घर की छत, आंगन या घर के पिछे के हिस्से में पाल सकते हैं। मूर्गीयों के पालने की जगह में भी बटेर पाले जा सकते हैं। मूर्गीयों के लिए बनाएं गएं जालीदार पिंजड़े में या फिर मूर्गी फार्म में भी इसे रख सकते हैं।
  • बटेर पालने के लिए सबसे पहले जमीन के उपर लकडे का बुरादा या धान की भूसी को बिछा दें
  • उस बिछावन के उपर बटेर को रखें ताकि बटेर को बिमारी से बचाया जा सके
  • चारा के लिए बाजार में मिलनेवालें मूर्गी के दाने को ही इस्तमाल कर सकते है

 फायदे

  • बटेर मांस और अंडे उत्पादन के लिए अच्छा स्त्रोत है
  • बटेर जल्द अंडे देती है। चूजे 6-7 हफ्ते में ही अंडे देने लगते है 
  • मादा प्रतिशत 250 से 300 अंडे देती है। अंडे 10 से 15 ग्राम के वजन के होते है। अंडे दिखने में चितकबरे रंग के होते है।
  • इन अंडों की गांव में ही खपत हो सकती है
  • बटेर के अंडो में मूर्गीयों के अंडे से ज्यादा पोषक तत्व पाये जाते है। बटेर के अंडे में से विटामीन ए और प्रोटिन भरपुर मिलता है। बटेर के अंडो का बाजार मूल्य भी ज्यादा मिलता है। बटेर के अंडे खाने में स्वादिष्ट होते है। घर के लिए भी अंडा इस्तमाल कर कम पैसे में पोषक तत्व पा सकते है
  • मांस के लिए बटेर का उत्पादन कर सकते है। 45 दिनों में ही बटेर वयस्क हो जाते है। इसका वजन 200 से 250 ग्राम होता है। बाजार मूल्य 60 रुपये

लागत और आमदनी

  • बटेर का आकार छोटा होता है इसलिए उसे जगह कम चाहिए यानि आपकी जगह का खर्चा कम
  • जहां आप 1000 मूर्गे पालते है वहां 6000 बटेर पाल सकते है
  • बटेर का चूजा कम दामों में मिलता है
  • अगर आपकों बटेर के लिए चूजा नही मिल रहा तो पटना वेटरनरी कॉलेज से संपर्क कर सकते है
  • दवा पर खर्च नही
  • इसे घर में पाला जाता है तो घर के शिक्षित बेरोजगार युवा और महिलाएं भी पाल सकती है
  • यानि कुल मिलाकर बटेर कम लागत में ज्यादा आमदनी करा सकता है।

विशेष ध्यान – बटेर के चूजे बहुत छोटे और नाजूक होते है। पहले हफ्ते में उनका विशेष ध्यान रखना पडता है। कड़ी ठंड या बहुत ज्यादा गर्मी में चूजे मर जाते है। पहले हफ्ते में मृत्यु दर अमुमु 2 से 3 प्रतिशत होती है। अगर पहला हफ्ता सही देखभाल से निकल गया तो दूसरे हफ्ते में मृत्यु दर कम हो जाती है।

 

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Vandana Singh
वंदना सिंह को पत्रकारिता का 10 साल का अनुभव है