सर्दियों में होने वाला है आपकी फसल पर वूली एफिड (Woolly aphid) का खतरनाक हमला, क्या आपने की बचने की तैयारी? नहीं की, तो पढ़िए कैसे बचाएं वूली एफिड के अटैक से फसल को

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अक्टूबर महीना शुरु हो चुका है और अब दिवाली के तुरंत बाद सर्दियों शुरु हो जाएंगी। ये वो वक्त है, जो वूली एफिड (woolly aphid) नाम के एक खतरनाक कीट को अपना खानदान तेजी से बढ़ाने और फसलों पर ज्यादा ताकत के साथ हमला करने के लिए सबसे बढ़िया माहौल और मौसम देता है।




ये सर्दियों में शुरु में फसलों पर दिखाई नहीं देते, लेकिन अप्रैल महीने के आते आते फसलों पर दिखाई देने लगते हैं। वूली एफिड (woolly aphid) अंडे नहीं देता बल्कि सीधे बच्चे पैदा करता है। गर्मियों में यह रोजाना 15 से 20 बच्चे पैदा करता है जबकि सर्दियां शुरु होने से लेकर मार्च तक ये बहुत धीमी गति से 1-2 बच्चे ही पैदा करता है।

लेकिन मई और जून का महीना आते ही ये बहुत तेजी से बढ़ता है और फिर अक्टूबर में तेजी से बच्चे पैदा करने लगता है। बस यही वक्त होता है जब ये फलों के बाग में हमला करने लगता है। तापमान अगर 18-20 डिग्री तक चला गया तो इसका हमला बहुत ज्यादा असरदार होता है यानी फसल को काफी नुकसान होता है।




अगर सूखा मौसम है तो फिर यह पौधे की बीमों और टहनियों पर अटैक करता है।

अक्टूबर महीने के अंत या फिर नवम्बर के शुरुआती दिनों के बीच वूली एफिड कीट, पेड़ों के तनों में चला जाता है।

किस पौधो या फसलों पर होता है इसका ज्यादा असर

आमतौर पर वूली एफिड का अटैक सबसे ज्यादा सेब के पेड़ों और पौधशालाओं पर होता है।

वूली एफिड भारत में कब और कहां से आया।

वूली एफिड एक विदेशी कीट है जो पिछले करीब सवा सौ साल से भारत की फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है। 1889 में ये सबसे पहले विदेश से लाई गई सेब की एक सामग्री के साथ तमिलनाडु के कोन्नूर क्षेत्र में पहुंचा। उसके बाद ये तेजी से पूरे देश में फैल गया।




कैसे करें बचाव

  1. 200 लीटर पानी में 700 मिली मीटर क्लोरोपाइरीफॉस कीटनाशक को अच्छे से मिलाकर घोल बना लें। फिर इस घोल में से 25 से 30 लीटर घोल अलग बर्तन में निकाल लें और जिस पेड़ पर वूली एफिड कीट दिखाई दे रहे हैं उसके तने के चारों तरफ एक घेरा बनाकर डाल दें।
  2. ध्यान रहे कि अगर बरसात हो चुकी है और उसके तुरंत बाद आप इस घोल को डाल रहे हैं तो ये अच्छा है क्योंकि यह घोल वूली एफिड के साथ साथ बाकी कई और बिमारियों को भी नियंत्रित कर लेता है।
  3. अप्रैल से अगस्त के महीने तक वूली एफिड (woolly aphid) से बचने के लिए बाग-बगीचों में कीटनाशकों का इस्तेमाल ना करें। अगर ऐसा किया, तो वूली एफिड (woolly aphid) तो मरेंगे नहीं बल्कि इसके उलट माइट जैसी अन्य बिमारियों का हमला शुरु हो जाएगा।
  4. बाग के पेड़ों से फल तोड़ने के बाद टहनियों और तनों पर लगे वूली एफिड को सही ढंग से कीटनाशक का छिड़काव कर खत्म किया जा सकता है।

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News Reporter
वंदना सिंह को पत्रकारिता का 10 साल का अनुभव है