किस कंपनी के साथ, कब और कैसे करें आर्टिमिशिया की कॉन्ट्रैक्ट खेती, पढ़ें विस्तारपूर्ण रिपोर्ट

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पहले हमने खबर पोस्ट की थी कि आर्टिमिशिया की खेती से किस किसान ने कमाए करोड़ों रूपए। फिर खबर पोस्ट की कि कैसे होती है आर्टमिशिया की खेती। अब इस रिपोर्ट में आपको जानने को मिलेगा कि कैसे, कब और कहां होता है आर्टिमिशिया की खेती का कॉन्ट्रैक्ट।

देश में औषधी पर आधारित फसलों को बढ़ाना देने में लगी सरकारी संस्था सीमैप के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार ने इस बारे में किसानख़बर.कॉम को Exclusive इंटरव्यू में विस्तार पूर्वक जानकारी दी है।




किन किन राज्यों में होती है ये फसल

इस फसल को सीमैप फिलहाल यूपी, बिहार, उत्तराखंड, गुजरात और मध्य प्रदेश राज्य के कुछ जिलों में करवा रहा है। करीब 3 हजार से ज्यादा किसान करीब 4 हजार एकड़ में इस खेती को सीमैप के जरिए रतलाम स्थित एक कंपनी के लिए कर रहे हैं। लखीमपुर, सीतापुर, राय बरेली, आनंद और रतलाम जिलों के आसपास आर्टिमिशिया की खेती बहुत हो रही है।




क्या छोटा किसान कर सकता है ये फसल

सीमैप के जरिए किसानों से इस फसल की कॉन्ट्रैक्ट करने वाली कंपनियां एक बात पर खासतौर पर ज्यादा गौर करती है। वो ये कि उनको इस फसल को आपके खेत से लाने-ले जाने में कितनी लागत आएगी। उनके नजदीकी सेंटर से कितनी दूरी पर है आपका खेत। ऐसे में अगर आप 1-2 एकड़ में ही खेती करना चाहते हैं तो बेहतर होगा कि आप अपने आसपास के किसानों का एक समूह बनाकर इस फसल को करें, ताकि कंपनी को भी लागत कम पड़े और आप भी आर्टिमिशिया की लाभकारी खेती कर सकें।

डॉ.कुमार के मुताबिक औषधी से संबंधित आर्टिमिशिया जैसी बाकी कई और फसलों के बारे में किसानों को जानकारी देने के लिए सीमैप की टीम किसानों से व्यक्तिगत रूप से समय समय पर मिलती है। खासतौर पर 31 जनवरी को लखनऊ में होने वाले किसान मेले में इस तरह की जानकारी हजारों किसानों को दी जाती है।

कैसे पूरी होती है कॉन्ट्रैक्ट की प्रक्रिया

आर्टिमिशिया की नर्सरी बनाने से काफी पहले ही किसानो के साथ कॉन्ट्रैक्ट कर लिया जाता है। अगस्त-सितम्बर महीने के दौरान ये कॉन्ट्रैक्ट होते हैं। जो किसान सीमैप के देश में मौजूद पांचों में से किसी भी सेंटर के नजदीक हैं वो या तो नजदीकी सेंटर में जाकर ये कॉन्ट्रैक्ट कर सकते हैं या फिर किसानों से आर्टिमिशिया की फसल खरीदने वाली कंपनी के रतलाम दफ्तर में कॉन्ट्रैक्ट कर सकते हैं। इसके अलावा अगर कंपनी किसी इलाके में पहले से इस खेती को करवा रहा है जैसे आनंद, लखीमपुर इत्यादि, तो वहीं पर कंपनी किसानों के साथ कॉन्ट्रैक्ट कर लेती है।

ट्रेनिंग

नर्सरी लगाने, उसके रख-रखाव, पौधों को खेतों में लगाने और फिर जून में उसकी कटाई तक के रखरखाव की ट्रेनिंग किसानों की सीमैप के जरिए ही दी जाती है। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार के मुताबिक, सीमैप की टीम गांव गांव जाकर भी लोगों को इस फसल की खेती करने के लिए प्रोत्साहित करती है और ट्रेनिंग भी देती है।

मिट्टी का सैंपल

वैसे तो अब हर तरह की फसल करने से पहले मिट्टी की जांच कम से कम 2-3 साल में एक बार लेने की सलाह दी जाती है। लेकिन अगर आप पहली बार आर्टिमिशिया की खेती करने वाले हैं तो कॉन्ट्रैक्ट करने से पहले अपनी मिट्टी की जांच जरूर करवा लें और कॉन्ट्रैक्ट से पहले कंपनी या सीमैप के अधिकारियों को ये रिपोर्ट दिखा दें।




फसल का पैसा कब मिलता है।

फसल मई के अंत में या फिर जून के पहले हफ्ते में कटती है। जब कंपनी आपके खेत से फसल को ले जाती है, उसके करीब 1 महीने के अंदर आपके बैंक में कंपनी पैसे ट्रांसफर कर देती है। फसल के लिए बीज सीमैप मुफ्त में देता है।

कैसे होती है ­आर्टिमिशिया की खेती

ये जानने के लिए आपको अगली ख़बर को पढ़ना होगा, जिसमें आर्टमिशिया की लागत से लेकर कमाई तक का पूरा ब्यौरा दिया गया है।मलेरिया की दवा में इस्तेमाल होने वाली आर्टिमिशिया की कॉन्ट्रैक्ट खेती की पूरी जानकारी’ नामक शीर्ष वाली खबर को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। अगर लिंक ना खुले या कोई दिक्कत आए, तो कृपया आप किसानख़बर.कॉम के ताजा खबर सेक्शन में इस खबर को पढ़ सकते हैं।

कैसे और किसको करें संपर्क

यदि आप इस फसल को करना चाहते हैं तो आप सीधे सीमैप में संपर्क कर सकते हैं। सीमैप में संबंधित अधिकारी का नाम और नंबर जानने के लिए कृप्या आप अपना पूरा नाम, आपके शहर, तहसील और गांव का पूरा नाम, आपका मोबाइल नंबर और ये कितने एकड़ खेत में आप आर्टीमिशिया की खेत करना चाहते हैं, ये लिखकर हमको kisankhabar@gmail.com पर ईमेल कर दीजिए। ध्यान रहे, अधूरी जानकारी भेजने पर संबंधित अधिकारी का नाम और नंबर नहीं मिल पाएगा। साथ ही ये भी ध्यान रखें कि वॉट्सअप, फेसबुक, ट्विटर इत्यादि पर भी कोई नंबर शेयर नहीं होगा।

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News Reporter
वंदना सिंह को पत्रकारिता का 10 साल का अनुभव है

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