एक किसान ने पंजाब में अपने गांव को बना दिया मिनी हॉलैंड जैसा देश, लेकिन कैसे?

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ग्लाडियोलस के फूलों की खेती से एक एकड़ में डेढ़ लाख रूपए का लाभ हो सकता है

अगर आप दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बैंगलोर, हैदराबाद, पुणे जैसे बड़े शहरों में रहते हैं तो निश्चित तौर पर आपने किसी सम्मान समारोह और शादी इत्यादि में फूलों का गुलदस्ता लेते लोगों को देखा होगा।

इन फूलों को देखकर आपको अहसास हो जाता है कि ये फूल कोई आम गेंदा या गुलाब का फूल नहीं बल्कि विदेशी फूल ग्लाडियोलस होता है। ऐसे फूलों का एक गुलदस्ता 400-500 रूपए के करीब आपको रिटेल में मिलता है।

गुलाब और गेंदे के फूलों की खेती के मुकाबले ग्लाडियोलस की खेती में कई गुना फायदा होता है। इसी बात को पंजाब के गुरविंदर सिंह सोही ने बेहतर ढंग से समझा और अब वो कमाई जबरदस्त कर रहे हैं।

ग्लाडियोलस के फूल
ग्लाडियोलस के फूल

किसान सोही ने नानोवाल गांव में 10 एकड़ खेत में ग्लाडियोलस के फूलों की खेती कर रखी है। इन्हें देखने पर लगता है कि मानो यूरोपीयन देश हॉलैंड में विदेशी फूलों से भरे किसी खेत में आप खड़े हो। ऐसा नजारा शाहरूख खआन की फिल्म DDLJ में दिखाया गया है।

कितनी कमाई है

इन फूलों को सोही लुधियाना, पटियाला और चंडीगढ़ में एजेंटों और डीलरों को भेजते हैं। Facebook और Whatsapp के माध्यम से वो इसकी खूब मार्केटिंग करते हैं, जिससे उनको नए खरीददार मिलते हैं।

ग्लाडियोलस की इन टहनियों से रूपए 2 लाख प्रति एकड़ तक की कमाई होती है। शादी और त्योहारों के सीजन में तो एक टहनी की कीमत 7 रूपए हो जीता है।

शुरू में प्रति एकड़ 1.5 लाख रूपए की लागत आती है। किसान सोही को इन फूलों से हर साल प्रति एकड़ 1.5 लाख से ऊपर का लाभ होता है। अगले सीजन में इन्हीं फूलों से अगले साल के लिए बीज मिल जाते हैं।

ग्लाडियोलस के फूल
ग्लाडियोलस के फूल

कैसे की शुरुआत

साल 2008 में सोही ने ग्लोडियोलस फूलों की खेती शुरू की थी। इसकी खेती से जुड़े सभी तरह के लाभ और खतरों के बारे में जानने के बाद ही उन्होंने इसे करने का फैसला लिया।

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News Reporter
वंदना सिंह को पत्रकारिता का 10 साल का अनुभव है

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