किसानों का 1200 करोड़ रूपए का कर्ज चुकाने के लिए अमेरिका में छोड़ दी नौकरी

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मधुचंदने के आने से किसानों की आत्महत्याओं की घटनाएं रूक गई

गरीब लोगों की मदद करने के लिए अपना सब कुछ छोड़ देने वाले हीरो फिल्मों में तो बहुत देखे होंगे, लेकिन असल जिन्दगी में शायद ही कोई ऐसा देखा होगा। अगर नहीं देखा है तो अब देखिए। केलिफोर्निया में आईटी इंजीनियर की नौकरी कर आराम की जिंदगी जीने वाले मधुचंदन चिक्कादेवैया को एक सुबह उनके ज़मीर ने आवाज़ दी।

उनके जहन में ख्याल आया कि अपने गांव मंडया जाकर उन्हें खस्ताहाल किसानों की मदद करनी चाहिए। ऐसे में 2014 में वो अपनी बड़ी नौकरी छोड़कर भारत वापस आ आए। फिर जो कुछ उन्होंने भारत में किया, उसे खेती की दुनिया में लोग ‘Organic Mandya’ के नाम से जानते हैं।

हालातों से बेहाल मंडया गांव

मंडया गांव में खेती करते किसान
मंडया गांव में खेती करते किसान

बेंगलुरु से करीब 100 किलोमीटर दूर मैसूर हाइवे पर एक छोटा सा गांव है मंडया। बैंकों का साल 2014-15 में मंडया के किसानों पर करीब 1200 करोड़ रूपये का कर्ज बकाया था।

फसलों की कम कीमत, बढ़ती लागत, कभी सूखा, तो कभी बाढ़ ने यहां के किसानों के हालात बहुत दयनीय कर रखे थे। यहां की फसल को सीधे लोगों तक पहुंचाने की भी सुविधा नहीं थी। बिचोलियों के जरीए ही सबकुछ होता था।

कई किसान तो इस सबसे परेशान आकर खेती छोड़ शहर में मजदूरी करने चले गए। जुलाई 2015 में इसी इलाके में 20 गन्ना किसानों ने आत्महत्या की।

मंडया से ऑर्गेनिक मंडया के जन्म की कहानी

इसी गांव में पैदा होने वाला आईटी इंजीनियर मधु ने गांव का ये हाल देखकर फैसला किया कि वो गांव के सभी किसानों को एक ब्रांड के साथ जोड़ेंगे। ताकि किसानों को पहुंच सीधे ग्राहकों तक हो सके और उन्हें अपनी फसल की सही कीमत भी मिल सके।

इसके लिए उन्होंने ऑर्गेनिक खेती का जरीया बनाया। अपने दोस्तों और सहकर्मियों से मधु ने 1 करोड़ रूपये जमा किए। इन पैसों से उसने Mandya Organic Farmers Cooperative Society की शुरु की। इसके अलावा उसने ‘Organic Mandya’ नाम से एक ब्रांड भी registered करवाया, जिसमें शुरु में ही 240 किसानों को जोड़कर काम शुरु कर दिया।

खेती की नई तकनीक के जरिए चावल, दाल और मसालों का उत्पादन किया गया। फिर इन सभी उत्पादों को Organic Mandya Shops पर बेचना शुरु कर दिया।

मंडया गांव में खेती करते शहर से आए लोग
मंडया गांव में खेती करते शहर से आए लोग

धीरे-धीरे कारवां बढ़ने लगा

किसानों और आर्गेनिक खेती से नौकरी पेशा लोगों और गैर-किसान लोगों को जोड़ने के लिए मधु ने एक और अच्छा कदम काम किया। उसने Sweat Donation Campaign भी शुरू कर दिया।

इस कैंपेन में शहर में रहने वाले लोगों को 1 दिन के लिए Volunteer के रूप में खेतों में काम करने का मौका दिया जाता है। इससे लोगों को ऑर्गेनिक खेती के बारे में खुद काम करके ज्यादा जानकारी और फायदों के बारे में पता चलता है।

बहुत ही कम समय में इस प्रोग्राम से करीब एक हजार से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं।

इसके अलावा Farm Share नाम से एक और कार्यक्रम शुरू किया। इसमें शहरी परिवार रूपए 35,000 के किराये पर आधे से 2 एकड़ जमीन लेते हैं और खुद अपने हाथों से खुद के लिए ऑर्गेनिक प्रोडक्ट उगाते हैं।

सुनहरा भविष्य

बड़े बड़े स्टोर्स में जाते हैं मंडया गांव के किसानों के उत्पाद
बड़े बड़े स्टोर्स में जाते हैं मंडया गांव के किसानों के उत्पाद

अब इतनी कड़ी मेहनत के बाद Organic Mandya करोड़ो की कमाई कर रहा हैं। शरुआती 4 महीने में 1 करोड़ की कमाई हुई है। अब 200 एकड़ खेत पर 500 से ज्यादा किसान काम कर रहे हैं।

मधु की योजना अब इस मुहिम से 10 हजार परिवारों को जोड़ने की है। जिससे किसानों के इस ग्रुप को 30 करोड़ रूपए जुटाने में मदद मिलेगी।

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News Reporter
वंदना सिंह को पत्रकारिता का 10 साल का अनुभव है

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