दो भारतीय किसानों की सफलता की गूंज अमेरिका पहुंची, हारवर्ड बिजनस स्कूल में खेती की नई तकनीक पर दिया लेक्चर

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भारतीय किसानों की सफलता की गूंज अमेरिका के हारवर्ड बिजनस स्कूल तक पहुंची

महाराष्ट्र राज्य से जब भी कोई ख़बर टीवी पर आती है तो वो किसानों की आत्महत्या से ही जुड़ी होती है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से किसानख़बर.कॉम ने महाराष्ट्र में खेती में सफलता के झंडे गाड़ने वाले किसानों की कहानी की सीरीज चला रखी है। उसी कड़ी में अब 2 ऐसे किसानों की कहानी है जो जलगांव में खेती करते करते अमेरिका के 108 साल पुराने हारवर्ड बिजनस स्कूल में खेती पर लेक्चर देने पहुंच गए।

नौकरी छूट जाने के बाद अब 25 लाख रुपए की सालाना कमाई करने वाले किसान राजेंद्र हरी पाटील और हेमचंद्र डागाजी पाटील की सफलता की कहानी। दोनों ही जलगांव से है और दोनों ही हाल ही में विश्व विख्यात हारवर्ड बिजनेस स्कूल में खेती के विशेज्ञषों और अमेरिकी किसानों को खेती पर लेक्चर देने के लिए बुलाए गए थे।

किसान राजेंद्र शिक्षक से कैसे बने अमीर किसान

जलगांव टू हारवर्ड - राजेंद्र पाटिल
जलगांव टू हारवर्ड – राजेंद्र पाटिल

हाई स्कूल के शिक्षक से किसान बने राजेंद्र की एक दिन नौकरी अचानक छूट गई। किसान परिवार से होने की वजह से उन्होंने अपने 1.5 एकड़ खेत पर दोबारा से खेती शुरु करने का फैसला लिया। इसके लिए उन्होंने 6 एकड़ खेत किराए पर ले लिया।

इस बीच 2006 में पाटिल ने तकनीकी मदद के लिए एक कंपनी से संपर्क किया। कंपनी पाटिल को ड्रीप इर्रिगेश के उपकरण दिए और साथ में बीज भी दिए। इसके अलावा टीशू कल्चर पौधे और सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली उपलब्ध कराई गई। जरूरत पड़ने पर कृषि विशेषज्ञों से सहायता भी मिली।

राजेंद्र ने 2006 में केले के 10 हजार टिशू कल्चर पौधों से खेती शुरू की। 10 महीने बाद उनको इससे अच्छी पैदावार मिली। फिर अगले साल उन्होंने 18 हजार पौधे लगाए। इसके लिए उन्होंने रूपए 55 प्रति पौधा की कीमत दी थी। इस लागत से उनको प्रति पौधा 28 किलो की उपज हासिल हुई।

पैदावार इतनी हुई कि उनको माल बाजार ले जाने के लिए 11 ट्रक मंगवाने पड़े। 3 सालों में राजेंद्र ने 60 एकड़ जमीन लीज पर लेकर करीब 5 लाख पौधे लगाए। परंपरागत खेती में फसल को होने वाले 35 प्रतिशत नुकसान के मुकाबले टीशू कल्चर में सिर्फ 8 प्रतिशत ही नुकसान होता है। अब वो केले की खेती से 25 लाख रूपए कमाते हैं।

जलगांव टू हारवर्ड - राजेंद्र पाटिल
जलगांव टू हारवर्ड – राजेंद्र पाटिल

हेमचंद्र पाटिल ने भी गाड़े सफलता के झंडे

जलगांव टू हारवर्ड - राजेंद्र पाटिल
जलगांव टू हारवर्ड – राजेंद्र पाटिल

कुछ ऐसी ही कहानी हेमचंद्र पाटिल की भी रही, जो राजेंद्र के साथ हार्वड बिजनस स्कूल में लेक्चर देने के लिए गए थे।

हेमचंद्र ने 2001 में कॉलेज की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वो जलगांव जिले में खेती कर रहे अपने पिता के साथ देने लगे।

उनके पास कुल 12 एकड़ का खेत था। उन्होंने भी पाटिल की तरह ही ड्रिप इर्रिगेशन तकनीक का सहारा लिया।

साल 2003 आने तक हेमचंद्र ने सफेद प्याज का रिकार्ड उत्पादन उनके खेत से 19.66 मीट्रिक टन प्रति एकड़ की पैदावार हुई।

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News Reporter
वंदना सिंह को पत्रकारिता का 10 साल का अनुभव है

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