भारतीय तुलसी से बनी चाय की सिंगापुर में धूम, 300 किसानों को मिला ऑर्डर

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उत्तराखंड के किसान करेंगे तुलसी की चाय का एक्सपोर्ट

उत्तराखंड के आंगन में पैदा होने वाली तुलसी की महक अब सिंगापुर पहुंच गई है। उत्तराखंड के किसानों ने तुलसी से बनी विशेष चाय बनाई है, जिसकी सिंगापुर में जबरदस्त डिमांड है। अब इन किसानों को सिंगापुर से बड़ा ऑर्डर मिल गया है।

इस ऑर्डर से अब उत्तराखंड राज्य के 300 किसानों को बड़ी कमाई होने वाली है।

इन किसानों की इस सफलता के पीछे एक रोचक कहानी है। दरअसल, राज्य के चमोली जिले के कई इलाकों के किसान बंदरों और बाकी जानवरों से बहुत परेशान थे। क्योंकि ये जानवर फसल को बर्बाद कर दिया करते थे। ऐसे में हार्क यानी हिमालयन एक्शन रिसर्च सेंटर ने इन किसानों को तुलसी की खेती करने का सुझाव दिया।

किसानों को हार्क के अधिकारियों की बात समझ आ गई। फिर हार्क के अधिकारियों ने किसानों को तुलसी की चाय की खेती की जानकारी से लेकर तकनीकी सहायता तक सभी तरह की मदद की। अब करीब 150 बीघा खेत पर इस इलाके के 300 किसान यही फसल करते हैं।

तुलसी की बूरे वाली चाय के साथ डिप वाली चाय भी हार्क की मदद से ही तैयार की जा रही है। हार्क के वरिष्ठ अधिकारी महेंद्र कुंवर के का कहना है कि उन्होंने पहले चाय के कुछ सैंपल सिंगापुर में कुछ संभावित खरीददारों को भेजे गए थे। वहां उनको ये सभी सैंपल बहुत जबरदस्त लगे और उन्होंने बड़ा ऑर्डर दे दिया।

इस साल रूपए 1 करोड़ की चाय के एक्सपोर्ट का लक्ष्य रखा गया है। सिंगापुर के बाद अब तो दुबई से भी इसी चाय का बड़ा ऑर्डर मिलने की संभावना है।

तुलसी के फायदे

  1. सर्दी-जुकाम को रोकने में तुलसी की चाय काफी मदगार होती है। तुलसी की चाय का ना केवल स्वाद बल्कि खुशबू लाजवाब होती है।
  2. जहां पानी की कमी है, वहां भी तुलसी के पौधे उगाए जा सकते हैं।
  3. तुलसी का पौधा औषधियों में गिना जाता है और इसके अंदर से ऐसी गंध आती है, जो जानवरों को पसंद नहीं होती और जानवर इस वजह से फसल को नुकसान नहीं पहुंचाते।
  4. कमाई के लिहाज से सबसे अच्छी बात ये कि तुलसी की खेती साल में 3 बार की जा सकती है।

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News Reporter
वंदना सिंह को पत्रकारिता का 10 साल का अनुभव है

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