एयरवेज की नौकरी छोड़ करने लगा केंचुओं का व्यापार

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केंचुओं के व्यापार में खड़ा किया बड़ा धंधा

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में एक ऐसा व्यक्ति है जिसने एयरवेज की शानोशौकत से भरी रंगीन दुनिया की नौकरी को छोड़कर खेतों के लिए केंचुओं का बिजनस शुरु कर दिया।

दिलजिंदर सिंह – यही नाम है उस हिम्मती युवा का। लखीमपुर खिरी के गांव मोहनपुरवा के निवासी दिलजिंदर सिंह के खेत गन्ने से हरे भरे दिखते हैं। खास बात ये है कि वो खेत में पेस्टीसाइड्स का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं करतेभ. बल्कि केंचुओं की मदद लेते हैं।

Red Worm Business केंचुओं की खेती
Red Worm Business केंचुओं की खेती

जिधर देखो खेत में केंचुओं की बीट दिखती है। खेत में कहीं भी खोदने पर केंचुओं के गुच्छे मिलते है। दिलजिंद के मुताबिक केंचुओं किसान के सबसे अच्छे मित्र हैं क्योंकि ये खेत की मिट्टी को पोला रखने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।

अब मॉर्डन खेती करने वाले किसान वर्मी कम्पोस्ट और केंचुए की खाद का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। अपने खेत में दिलजिंदर सिंह गन्ने की पत्तियों को जलाते नहीं है बल्कि खेतों में सड़ने के लिए पड़ रहने देते हैं। जो कि बाद में खाद का रूप लेकर खेत की मिट्टी को उर्वरा शक्ति को बढ़ा देती है।

32 साल के दिलजिंदर एक एयरवेज कम्पनी में नौकरी किया करते थे। लेकिन पिताजी की मृत्यु के बाद उन्होंने गांव में ही खेती करने का फैसला किया।

ट्रेंच मेथड से गन्ना बोने वाले दिलजिंदर के मुताबिक केंचुओं की मदद से ही उनके खेतों में कम से कम प्रति एकड़ 500 कुंटल गन्ने की पैदावार होती है। जबकि केंचुओं के बिना खेती करने वाले दूसरे किसान को एक एकड़ में सिर्फ 300 कुंटल गन्ने का उत्पादन मिल पाता है।

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News Reporter
वंदना सिंह को पत्रकारिता का 10 साल का अनुभव है

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